गहरे समंदर की सैर करने फिर से तैयार हो जाओ कश्ती तैयार है। गहरे समंदर की सैर करने फिर से तैयार हो जाओ कश्ती तैयार है।
वो शख्स जिसकी आकृति बसती मेरे जेहन में है, है वही बसता मेरी कविताओं की धड़कन में है। वो शख्स जिसकी आकृति बसती मेरे जेहन में है, है वही बसता मेरी कविताओं की धड़कन म...
कब बनता है एक प्यारा सा गीत तुम्हारा और मेरा अपना। कब बनता है एक प्यारा सा गीत तुम्हारा और मेरा अपना।
क्योंकि आया बसंत है। क्योंकि आया बसंत है।
लोग ज़ख्मों पे मलते नमक हैं यहाँ- इश्क़ में ना करो आजमाइश सनम। लोग ज़ख्मों पे मलते नमक हैं यहाँ- इश्क़ में ना करो आजमाइश सनम।
ख़ुदी मिटा कर दूजों को अपनाती हूँ मैं, फिर भी किसी के ध्यान कभी नहीं आती हूँ मैं। ख़ुदी मिटा कर दूजों को अपनाती हूँ मैं, फिर भी किसी के ध्यान कभी नहीं आती हूँ म...